बहरैन की जनता ने मंगलवार १४ फरवरी को अपने आंदोलन की पहली वर्षगांठ मनायी जिसके दौरान सऊदी और बहरैनी सैनिकों के आक्रमणों में कई लोगों के शहीद होने का समाचार है। सऊदी और बहरैनी सैनिकों ने मनामा में पर्ल स्क्वायर को जहां से बहरैनी जनता का आंदोलन आरंभ हुआ था, कई दिन पहले से घेर रखा था और इस चौराहे की ओर बढ़ने वालों पर भीषण फायरिंग की गयी तथा आंसू गैस के गोले दाग़े गये किंतु इसके बावजूद बड़ी संख्या में लोग इस स्क्वायर तक पहुंचने में सफल हो गये जिसका नाम बहरैनी जनता ने शहीद स्क्वायर रख दिया है। बहरैन में राजशाही सरकार के विरुद्ध एक वर्ष से आंदोलन जारी है जिसके दौरान सैंकड़ों लोग हताहत व घायल हुए हैं और बहरैन की राजशाही सरकार ने प्रदर्शनों को रोकने के लिए सऊदी अरब सहित कई अरब देशों के सैनिकों को अपने देश में तैनात किया है। अमरीका और पश्चिमी देश बहरैन में व्यापक स्तर पर होने वाले मानवाधिकारों के हनन पर चुप्पी साधे हैं। इस देश में अमरीका का पांचवां बेड़ा है। इसी मध्य बहरैन के नेता इब्राहिम अलअरादी ने कहा है कि आले ख़लीफ़ा शासन, बहरैनी जनता का जनसंहार करना चाहता है। उन्होंने अलआलम टीवी चैनल से साक्षात्कार में इस बात की ओर संकेत करते हुए कि आले ख़लीफ़ा शासन बहरैन में जनसंहार का नया क्रम आरंभ करना चाहता है, कहा कि बहरैन का वर्तमान आंदोलन आगामी पीढ़ी के लिए है इसीलिए चौदह फ़रवरी को पर्ल स्क्वायर पर विरोध प्रदर्शन का बहुत महत्त्व है। श्री इब्राहीम अल अरादी ने इस बात की ओर संकेत करते हुए कि बहरैनी जनता, बहरैन में होने वाली घटनाओं का ज़िम्मेदार अमेरिका को समझती है, कहा कि बहरैनी जनता केवल अपना अधिकार चाहती है और इसीलिए विश्व समुदाय की नज़रों के सामने उसका दमन किया जा रहा है।
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